HomeNida FazliNida Fazli Shayari Top And Famous Collection-1

Nida Fazli Shayari Top And Famous Collection-1

Nida Fazli Famous sher

Nida Fazli;निदा का मतलब स्वर होता है और फ़ाज़ली कश्मीर के एक इलाके का नाम है इसी कारण उपनाम फ़ाज़ली रख लिया.

निदा फ़ाज़ली की शायरी की भाषा आम आदमी को भी समझ में आ जाती है. निदा फ़ाज़ली एक सूफ़ी शायर हैं रहीम, कबीर और मीरा से प्रभावित होते हैं तो मीर और ग़ालिब भी इनमें रच- बस जाते हैं। निदा फाज़ली की शायरी की जमीन विशुद्ध भारतीय है.

Nida Fazli का प्रारंभिक जीवन ग्वालियर में गुजरा ग्वालियर में रहते हुए, आपने उर्दू अदब में अपनी पहचान बना ली और बहुत जल्द ही उर्दू के एक महत्वपूर्ण शायर के रूप में पहचाने जाने लगे.
यहाँ Nida Fazli के कुछ चुनिंदा शेरो का संग्रह पेश कर रहें हैं उम्मीद है आप सबको बेहद पसंद आएगी.

Nida Fazli

कभी किसी को मुक़म्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता……

Kabhi kisi ko mukammal jahan nahin milta
Kahin zameen toh kahin aasman nahin milta

Nida Fazli

Nida Fazli

बात कम कीजे ज़ेहानत को छुपाए रहिए
अजनबी शहर है ये,दोस्त बनाए रहिए

दुश्मनी लाख सही,खत्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाए रहिए

ये तो चेहरे की शबाहत हुई तक़दीर नहीं
इस पे कुछ रंग अभी और चढ़ाए रहिए

ग़म है आवारा अकेले में भटक जाता है
जिस जगह रहिए वहाँ मिलते मिलाते रहिए

कोई आवाज़ तो जंगल में दिखाए रस्ता
अपने घर के दर -ओ -दीवार सजाए रहिए

Baat kam kije jehanat ko chhupae rahie
Ajnabi shahar hai ye,dost banae rahie

Dushmani lakh sahi,khatm na kije rishta
Dil mile ya na mile haath milae rahie

Ye toh chehre ki shabahat hui taqdeer nahin
Is pe kuchh rang abhi aur chdhae rahie

Gham hai aawara akele mein bhatak jata hai
Jis jagah rahie wahan milte milaate rahie

Koi aawaz toh jungle mein dikhaye rasta
Apne ghar ke dar-o-deewar sajae rahie

Nida Fazli

Nida Fazli

अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला
हम ने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला

उसको रुख़सत तो किया था,मुझे मालूम न था
सारा घर ले गया,घर छोड़ के जाने वाला

इक मुसाफ़िर के सफ़र जैसी है सब की दुनिया
कोई जल्दी में,कोई देर से जाने वाला

एक बे-चेहरा सी उम्मीद है,चेहरा चेहरा
जिस तरफ़ देखिये आने को है आने वाला

Ab khushi hai na koi dard rulane wala
Hum ne apna liya har rang zamane wala

Usko rukhsat toh kiya tha,mujhe maloom na tha
Saara ghar le gaya,ghar chhod ke jane wala

Ik musafir ke safar jaisi hai sabki duniya
Koi jaldi mein,koi der se jane wala

Ek be-chehra si ummed hai,chehra chehra
Jis taraf dekhiye aane ko hai aane wala

Nida Fazli

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम है

वक़्त के साथ है मिट्टी का सफ़र सदियों से
किसको मालूम,कहाँ के हैं,किधर के हम है

जिस्म से रूह तलक अपने कई आलम है
कभी धरती के,कभी चाँद नगर के हम है

चलते रहते हैं की चलना है मुसाफ़िर का नसीब
सोचते रहते हैं किस राहगुज़र के हम है

गिनतियों में ही गिने जाते हैं हर दौर में हम
हर कलमकार की बेनाम ख़बर के हम हैं

Apni marzi se kahan apne safar ke hum hain
Rukh hawaon ka jidhar ka hai udhar ke hum hain

Pahle har cheez thi apni magar ab lagta hai
Apne hi ghar mein kisi dusre ghar ke hum hain

Waqt ke saath hai mitti ka safar sadiyon se
Kisko maloom,kahan ke hain,kidhar ke hum hain

Jism se rooh talak apne kai aalam hain
Kabhi dharti ke,kabhi chand nagar ke hum hain

Chalte rahte hain ki chalna hai musafir ka nseeb
Sochte rahte hain kis rahguzar ke hum hain

Gintiyon mein hi gine jate hain har dour mein hum
Har kalamkaar ki benaam khabar ke hum hain

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